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Showing posts from March, 2021

भीष्म पितामह की इच्छा मृत्यु का रहस्य — उत्तरायण का महत्व

 भीष्म पितामह ने अपना शरीर 58 दिन बाद क्यों त्याग किया? — शास्त्रों से गहरा रहस्य जब हम धर्म, त्याग और प्रतिज्ञा की बात करते हैं, तो सबसे पहले जिस महान आत्मा का नाम आता है वह हैं भीष्म पितामह। महाभारत के युद्ध में बाणों की शरशैया पर लेटे हुए भी उन्होंने जीवन का ऐसा अद्भुत उदाहरण दिया जो आज भी हमें धैर्य, ज्ञान और भक्ति का मार्ग दिखाता है। लेकिन एक प्रश्न हमेशा मन में उठता है — 👉 उन्होंने 58 दिन तक शरीर क्यों नहीं छोड़ा?  सरल उत्तर — इच्छा मृत्यु का वरदान भीष्म पितामह को उनके पिता महाराज शांतनु ने “इच्छा मृत्यु” का वरदान दिया था। इसका अर्थ था कि वे जब चाहें तभी शरीर त्याग सकते थे। महाभारत युद्ध में अर्जुन के बाणों से घायल होने के बाद भी उन्होंने तुरंत शरीर नहीं छोड़ा क्योंकि वे सही समय की प्रतीक्षा कर रहे थे। 📜  शास्त्रीय संदर्भ यह प्रसंग मुख्य रूप से महाभारत के भीष्म पर्व और शांति पर्व में वर्णित है। शास्त्रों के अनुसार, भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने तक प्राण रोके रखे। उत्तरायण को देवताओं का दिन और मोक्ष का द्वार माना गया है। ☀️  उत्तरायण का आध्यात्मिक महत...

भगवान कृष्ण के 24 अवतार।

कृष्ण भगवान के अवतारों की संख्या अनगिनत है।हम मनुष्य के पास इतनी शक्ति नहीं की उन दिव्य पुरुषोत्तम, अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक के बारे में संपूर्णता से जान सके। लेकिन उनमें से 24 अवतार मुख्य माने जाते हैं। 1.नारायण 2. नारद 3. हरि 4. कपिल देव 5. दत्तात्रेय 6.वामन 7.परशुराम 8. वाराह 9. श्रीराम 10. मतस्य 11. कूर्म 12. धनवंतरि 13. मोहिनी 14. पृथु 15 सनत 16. सनातन 17. सनंदन 18. सनक 19. बलराम 20. नरसिंह 21.व्यास 22. कृष्ण 23. हयग्रीव 24.कल्कि अन्य अवतार - यग्न (यज्ञ),नर - नारायण,वासुदेव ,महाकाल,आदि।