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Showing posts from October, 2025

भीष्म पितामह की इच्छा मृत्यु का रहस्य — उत्तरायण का महत्व

 भीष्म पितामह ने अपना शरीर 58 दिन बाद क्यों त्याग किया? — शास्त्रों से गहरा रहस्य जब हम धर्म, त्याग और प्रतिज्ञा की बात करते हैं, तो सबसे पहले जिस महान आत्मा का नाम आता है वह हैं भीष्म पितामह। महाभारत के युद्ध में बाणों की शरशैया पर लेटे हुए भी उन्होंने जीवन का ऐसा अद्भुत उदाहरण दिया जो आज भी हमें धैर्य, ज्ञान और भक्ति का मार्ग दिखाता है। लेकिन एक प्रश्न हमेशा मन में उठता है — 👉 उन्होंने 58 दिन तक शरीर क्यों नहीं छोड़ा?  सरल उत्तर — इच्छा मृत्यु का वरदान भीष्म पितामह को उनके पिता महाराज शांतनु ने “इच्छा मृत्यु” का वरदान दिया था। इसका अर्थ था कि वे जब चाहें तभी शरीर त्याग सकते थे। महाभारत युद्ध में अर्जुन के बाणों से घायल होने के बाद भी उन्होंने तुरंत शरीर नहीं छोड़ा क्योंकि वे सही समय की प्रतीक्षा कर रहे थे। 📜  शास्त्रीय संदर्भ यह प्रसंग मुख्य रूप से महाभारत के भीष्म पर्व और शांति पर्व में वर्णित है। शास्त्रों के अनुसार, भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने तक प्राण रोके रखे। उत्तरायण को देवताओं का दिन और मोक्ष का द्वार माना गया है। ☀️  उत्तरायण का आध्यात्मिक महत...

क्या भगवान् सच में है?या केवल कल्पनामात्र?

  🌼 क्या भगवान सच में हैं — या केवल कल्पना? (एक सच्ची जिज्ञासा का शांत और गहरा उत्तर) — मन का सबसे पुराना प्रश्न कभी न कभी यह प्रश्न हर इंसान के मन में आता है — क्या सच में भगवान हैं? जब जीवन में दुख आता है, जब कोई चमत्कार सा अनुभव होता है, या जब मन अकेला महसूस करता है — तब यह सवाल और गहरा हो जाता है। यह केवल दर्शन का प्रश्न नहीं है, यह हमारे अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न है। और सच कहें तो — यह प्रश्न उठना ही आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है। 🪔 भगवान का सरल अर्थ क्या है? भगवान कोई केवल मूर्ति या कल्पना नहीं, बल्कि वह चेतना है जो इस पूरे ब्रह्मांड को चलाती है। जिस शक्ति से सूरज उगता है, जिससे हृदय धड़कता है, जिससे जीवन चलता है — वही परमात्मा है। सनातन दृष्टि में भगवान को अनुभव किया जाता है, सिर्फ तर्क से नहीं समझा जाता।  •  शास्त्र क्या कहते हैं:- हमारे सभी ग्रंथ — वेद, उपनिषद, पुराण — एक ही सत्य बताते हैं। सबसे स्पष्ट उत्तर मिलता है भगवद गीता में। करीब 5000 वर्ष पहले भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन से कहा —  “मैं इस सृष्टि का कारण भी हूं और आधार भी।” गीता अध्य...