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Showing posts from May, 2021

भीष्म पितामह की इच्छा मृत्यु का रहस्य — उत्तरायण का महत्व

 भीष्म पितामह ने अपना शरीर 58 दिन बाद क्यों त्याग किया? — शास्त्रों से गहरा रहस्य जब हम धर्म, त्याग और प्रतिज्ञा की बात करते हैं, तो सबसे पहले जिस महान आत्मा का नाम आता है वह हैं भीष्म पितामह। महाभारत के युद्ध में बाणों की शरशैया पर लेटे हुए भी उन्होंने जीवन का ऐसा अद्भुत उदाहरण दिया जो आज भी हमें धैर्य, ज्ञान और भक्ति का मार्ग दिखाता है। लेकिन एक प्रश्न हमेशा मन में उठता है — 👉 उन्होंने 58 दिन तक शरीर क्यों नहीं छोड़ा?  सरल उत्तर — इच्छा मृत्यु का वरदान भीष्म पितामह को उनके पिता महाराज शांतनु ने “इच्छा मृत्यु” का वरदान दिया था। इसका अर्थ था कि वे जब चाहें तभी शरीर त्याग सकते थे। महाभारत युद्ध में अर्जुन के बाणों से घायल होने के बाद भी उन्होंने तुरंत शरीर नहीं छोड़ा क्योंकि वे सही समय की प्रतीक्षा कर रहे थे। 📜  शास्त्रीय संदर्भ यह प्रसंग मुख्य रूप से महाभारत के भीष्म पर्व और शांति पर्व में वर्णित है। शास्त्रों के अनुसार, भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने तक प्राण रोके रखे। उत्तरायण को देवताओं का दिन और मोक्ष का द्वार माना गया है। ☀️  उत्तरायण का आध्यात्मिक महत...

सिद्धार्थ (गौतम) कैसे बने भगवान् बुद्ध?

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  सिद्धार्थ (गौतम) कैसे बने भगवान् बुद्ध? भगवान् बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व नेपाल के लुंबिनी में हुआ था।इनका पिता का नाम शुद्धोधन तथा माता का नाम मायादेवी देवी था। इनके जन्म के सातवें दिन बाद ही इनके माता का देहांत हो गया।इनका लालन पालन प्रजापति गौतमी ने की।आगे चलकर बौद्ध धर्म में दीक्षा ली।ऐसा कहा जाता है,इनकी माता ने जन्म से पूर्व स्वप्न में हाथी का दृश्य देखा था।इससे स्पष्ट हो गया,कोई महान आत्मा का आगमन होने वाला है। उनके जन्म के बाद ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की या तो एक महान शासक बनेगा,या फिर वैराग्य भावना आने पर एक महान दार्शनिक,उपदेशक, धर्म , सत्य,ओर अहिंसा का प्रवर्तक बनेगा। इस भविष्यवाणी के बाद इनके पिता ने यह संकल्प लिया कि सिद्धार्थ को सांसारिक दुखों से दूर रखूंगा ओर भोग - विलासिता जीवन में कोई कमी नहीं होने दूंगा। सिद्धार्थ ने अपने बचपन ओर गृहस्थ का ज्यादातर समय महल में ही बिताए। उन्होंने यशोधरा के साथ विवाह किया ओर उनके एक पुत्र भी हुए ,जिसका नाम राहुल था । कुछ समय बाद सिद्धार्थ ने महल से बाहर की दुनिया को देखने की इच्छा प्रकट की। अपने अनुचर को चलने   के लिए विव...

भारतीय सभ्यता और संस्कृति

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भारतीय सभ्यता और संस्कृति भारत एक देश ही नहीं , विश्व का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।ओर पूरी दुनिया का विश्व गुरु रहा है। यह भगवान् का सर्वाधिक प्रिय क्षेत्र रहा है।  जहां पर भगवान् ने कई अवतार एवं रूपो में प्रकट हुए है।ओर समस्त संसार में सत्यता ओर धर्म की स्थापना किए है। यह ऋषि,मुनि, के लिए प्रसिद्ध स्थल है। जहां पर वे ध्यान एवं तप के माध्यम से भगवान् को प्राप्त होते है। भारतवर्ष में लाखो की संख्या में मंदिर, शक्तिपीठ, ज्योतिर्लिंग,ओर भी कितने प्रसिद्ध मंदिर ओर तीर्थस्थल है।हरिद्वार,वृंदावन, अयोध्या, प्रयागराज, उज्जैन,काशी,ये सभी भारत के सुप्रसिद्ध तीर्थस्थल है। इनमे से कुछ यूनेस्को वर्ल्ड धरोहर (UNESCO)में भी शामिल है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इन तीर्थो में भ्रमण कर लेता है।वह कर्मबंधन से मुक्त हो जाता है। इसका इतिहास गौरवशाली रहा है।इसे प्राचीन समय में सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था।ओर भी कई नामो जैसे हिंदुस्तान, आर्यवर्त, भारतवर्ष से प्रसिद्ध रहा।इसका नाम भारत,देश के महान शासक के नाम पर रखा गया था। यह देश विविधताओं से भरी हुई है। यहां की जलवायु मौसम के अनुसार जगह - जगह बदलत...

भगवत गीता श्लोक

 भगवत गीता श्लोक परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्,  धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।। अनुवाद - हे पार्थ, मै साधुओं पुरुषों का उद्धार करने के लिए, तथा दुष्ट कर्म करने वालों का विनाश करने के लिए, और धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करने के उद्देश्य से में युगों - युगों में प्रकट हुआ करता हूं।   O Arjuna to liberate great soul,punish bad deeds and to establish discipline of truth ,Sanatan and eternal Dharma( religion ). I take incarnation time to time. *Deity Krishna wants to say Arjuna,I am the supreme deity ,I give emancipation to sadhus(devotee). Emancipation is the ultimate nature that free ones from bondage of life and death. *Bad deeds - One who perform wrong work by his karmik body. *To establish peace, prosperity, discipline, in the cosmos. *Take personification in many form as Narsimha,Ram, Krishna, Vaman, Narayan etc.

भगवत गीता श्लोक

 Bhagwat Gita verses यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।। अनुवाद - भगवान् श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है। है पार्थ, जब - जब धर्म की हानि ओर अधर्म की वृद्धि होती है ।तब - तब में इस धरती पर अवतार लेता हूं। O Arjuna, I took incarnation time to time. whenever Adharma (sin)get increased,and religion(truth) get detoriated. *Krishna supreme lord of universe. who attracted devotees with his pure blissful divine Leela with cowherd (Gopis) in Vrindavan forest. He killed Kansa and several demons. To remove evilness from society. He influenced Arjuna to kill kaurvas sinner one. Given Bhagwat Gita knowledge to Arjuna in the battlefield of kurukshetra (Haryana ) . Bhagwat Gita is one of the finest inspirational and motivational book on the Earth. Which is essence of Vedas and Upanishads. It is not only book but has tremendous quality and energy and epitome of knowledge to change one's life. It deals with every walk of life. It will help you to tou...

भगवत गीता श्लोक

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        भागवत गीता श्लोक कर्मण्यवादिकारस्ते मा फलेषु कदाचन, मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगस्त्व कर्मणि।। अनुवाद - श्री कृष्ण भगवान ने अर्जुन से कहा,     हे पार्थ ,तू केवल कर्तव्य कर्म कर, फल का आशा छोड़ दें। ओर तुझमें कर्म के प्रति आसक्ति भी नहीं  करनी चाहिए। इससे तुम कर्म बंधन में नहीं लिप्त होगे। *कर्म के बंधन में बंधने से मनुष्य को उस कर्म के प्रति आसक्ति हो जाती है। इसलिए हमे सदैव अपने कर्मो पर दृष्टि रखनी चाहिए। Supreme lord Krishna tells to Arjuna ,you should do your action effortlessly, without thinking about results and entanglement. * Always be careful about your action and keep eyes on it.