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Showing posts from June, 2021

भीष्म पितामह की इच्छा मृत्यु का रहस्य — उत्तरायण का महत्व

 भीष्म पितामह ने अपना शरीर 58 दिन बाद क्यों त्याग किया? — शास्त्रों से गहरा रहस्य जब हम धर्म, त्याग और प्रतिज्ञा की बात करते हैं, तो सबसे पहले जिस महान आत्मा का नाम आता है वह हैं भीष्म पितामह। महाभारत के युद्ध में बाणों की शरशैया पर लेटे हुए भी उन्होंने जीवन का ऐसा अद्भुत उदाहरण दिया जो आज भी हमें धैर्य, ज्ञान और भक्ति का मार्ग दिखाता है। लेकिन एक प्रश्न हमेशा मन में उठता है — 👉 उन्होंने 58 दिन तक शरीर क्यों नहीं छोड़ा?  सरल उत्तर — इच्छा मृत्यु का वरदान भीष्म पितामह को उनके पिता महाराज शांतनु ने “इच्छा मृत्यु” का वरदान दिया था। इसका अर्थ था कि वे जब चाहें तभी शरीर त्याग सकते थे। महाभारत युद्ध में अर्जुन के बाणों से घायल होने के बाद भी उन्होंने तुरंत शरीर नहीं छोड़ा क्योंकि वे सही समय की प्रतीक्षा कर रहे थे। 📜  शास्त्रीय संदर्भ यह प्रसंग मुख्य रूप से महाभारत के भीष्म पर्व और शांति पर्व में वर्णित है। शास्त्रों के अनुसार, भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने तक प्राण रोके रखे। उत्तरायण को देवताओं का दिन और मोक्ष का द्वार माना गया है। ☀️  उत्तरायण का आध्यात्मिक महत...

बिहार की शिक्षा व्यवस्था।

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  बिहार की शिक्षा व्यवस्था। बिहार देश की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला ओर सर्वाधिक नवयुवकों वाला राज्य है। बिहार के लोगों की प्रतिभा का कायल पूरा संसार है। यही वो धरती है , जहां से आजादी का बिगूल बजा था। यह कला एवं संस्कृति के मामले में विशेष रूप से समृद्ध है। यही राज्य ने समूचे विश्व को नालंदा विश्वविद्यालय जैसे   उत्कृष्ट जगह प्रदान किया। जहां पर लोग शिक्षा से  अवगत हो सके। लेकिन आज के समय में , यहां की शिक्षा व्यवस्था उच्च कोटि की नहीं रही। किसी भी समाज का उत्थान वहां की सरकार और नागरिक के सहयोग के बगैर नहीं हो सकती। आजादी के बाद भी इस राज्य की ऐसी दुर्दशा है। यहां के जनता व विद्यार्थियों के साथ अन्याय किया जा रहा है।वैसे यहां की जनसंख्या के आंकड़े कम नहीं।लेकिन सरकार का यह दायित्व बनता है। शिक्षा ओर समाज के उत्थान में अपना शत प्रतिशत योगदान करे।लेकिन ऐसा कभी आजादी के बाद देखने को नहीं मिला। प्राथमिक विद्यालयों में  उच्च कोटि की शिक्षा नहीं दी जाती। शिक्षक  आराम से तनख्वाह पाता है। शिक्षक व सरकार का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को आसानी से पास व उत्कृष्...

विश्व पर्यावरण दिवस,5 जून।

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  विश्व पर्यावरण दिवस । विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष 5 जून को मनाया जाता है।यह सत्र पहली बार 1974 में हुआ था ।यह पहल संयुक्त राष्ट्र संघ के नेतृत्व में प्रत्येक वर्ष होता रहा है। इसमें करीब 150 देश शामिल होते है।इस संगठन का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा, जनसंख्या नियंत्रण , समुद्री प्रदूषण, वैश्विक तापमान, वन्य जीव एवं वनस्पति की रक्षा संबंधित चर्चे किए जाते है। पर्यावरण की रक्षा से जुड़े सभी समस्याओं पर चर्चा ओर उसके समाधान पर निर्णय लिए जाते हैं। पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर, संयुक्त राष्ट्र संघ एवं सभी सदस्य देश विश्व व्यापी जागरूकता अभियान , सोशल मीडिया, चलचित्र, समाचारपत्रों,  एवं  सुप्रसिद्ध हस्तियों के माध्यम से लोगों को जागरूक करते है। मनुष्य का जब से सोचने ओर समझने की क्षमता विकसित हुआ है।तब से इसने पर्यावरण का दोहन करता रहा है। ओर इसका मुख्य कारण विज्ञान ओर आधुनिकीकरण ही है । हमने बहुत हद तक इसका समर्थन किया है। यही कारण है,आज हम सबको प्रकृति अपना वास्तविक रूप दिखा रही है।इस पूरे कोरॉना काल में प्रकृति ने हम सब के चेहरे पर मुखौटा लगा ही दिया।आज तरह तरह ...

इम्यूनिटी मजबूत करने के 10 तरीके ।

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  इम्यूनिटी मजबूत करने के 10 तरीके । प्रिय मित्रों, में आपको इस लेख में शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के 10 तरीके बताने जा रहा हूं । आशा है आप इसे जरूर पसंद करेंगे। इसको अपने दैनिक जीवन में उतारकर आप अपने शरीर को बेहतर बना सकते हैं। 1. गिलोय (गुरीच) - यह एक प्रकार की लत्ती व चमत्कारी औषधि है।जो जंगल में वृक्ष के शाखा में लिपटा हुआ मिल जाएगा।यह एक परजीवी पौधा है।इसमें सभी तरह के औषधीय गुण मौजूद हैं।यह आपके इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बना देता है ओर रक्त को शुद्ध करता है। कब्जियत, नपुंसक्ता, दुर्बलता, खून की कमी को दूर करता है। 2. सिंह क्रिया - यह क्रिया आपके  फेफड़े ओर स्वसन तंत्र को बहुत ही बेहतर बना देता है।अगर आपको स्वास से संबंधित समस्या है।तो आपको सिंह क्रिया अवश्य करनी चाहिए। *यह क्रिया करने के लिए। •पद्मासन में बैठे,(पाल्थी लगाकर बैठ जाएं) •दोनों हथेली से घुटने को पकड़े, पीठ की रीढ़ को सीधा रखें। •ओर जीभ निकालकर 21 बार हाफना है ,जोर से । *इसे सही ढंग से करने के लिए यूट्यूब पर सिंह क्रिया खोजे ओर सदगुरु के निर्देशन में करें।   https://youtu.be/GxAGh3CRPM0 3...

हिंदू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार नारद कौन हैं?

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हिंदू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार नारद कौन हैं? आइए आपको बताते हैं महान ऋषि, पौराणिक ग्रंथों के महापुरूष, आचार्य महर्षि नारद के बारे में। वह शायद पौराणिक पाठ में सबसे प्रमुख पात्र है। नारद जी हमेशा जप करते हैं,श्री हरि नारायण को प्रसन्न करने के लिए नारायण, नारायण, नारायण। उन्होंने हमेशा भक्त को भगवान् से मिलने के लिए प्रेरित किया। गुरु के रूप में महान भक्त ध्रुव, प्रह्लाद, महर्षि वेदव्यास और कई शिष्यों को शिक्षा दी। पौराणिक पहलुओं के अनुसार  नारद अपने पिछले जन्म में एक गंधर्व थे। एक दिन ब्रह्मा जी ने नारायण की महिमा का गुणगान करने के लिए  एक कार्यक्रम का आयोजन किया और देवताओं,गंधर्व, यक्ष आदि को आमंत्रित किया। सभी लोक, देव, गंधर्व, यक्ष और अन्य से कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आए। एक गंधर्व , दिव्य स्त्री की ओर मोहित हो गए, इसलिए ब्रह्मा जी क्रोधित हो कर उस गंधर्व को शाप दिया," उन्हें नश्वर दुनिया में शूद्र कुल में जन्म लेना होगा"। इसके बाद, उन्होंने दासी के पुत्र के रूप में जन्म लिया। दासी सदा साधु, संत, ओर वैष्णवों की सेवा करती थी। उनका बेटा भी उनकी सेवा के लिए पूरी तरह से सम...

क्या धनानंद नंद वंश का सबसे कमजोर शासक था?

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  क्या धनानंद, नंद वंश का सबसे कमजोर शासक था? छवि स्रोत unsplash.com धनानंद नंद वंश के अंतिम सम्राट थे। लेकिन उनका व्यवहार बिल्कुल अजीब था। राज्य की सेवा करने के बजाय वह जुआ में समय बिताकर वासनापूर्ण जीवन का आनंद ले रहा था। अपने निजी इस्तेमाल के लिए राज्य के राजस्व का उपयोग करता था।   चाणक्य एक महान ब्राह्मण, उपदेशक और धनानंद के दरबार के मंत्री थे। और चाणक्य को विष्णु गुप्त या कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है।  राज्य के लिए अनुचित व्यवहार के लिए धनानंद की कटु आलोचना की। उन्होंने कहा, "एक राजा को हमेशा कामुक जीवन का आनंद लेने के बजाय अपने राज्य की बेहतरी के बारे में सोचना चाहिए"। धनानंद ने अपना अपमान समझकर उसे पीछे धकेल दिया, चाणक्य नीचे गिर गए और उनकी शीखा खुल गई। चाणक्य क्रोधित हो गए और धनानंद को  चुनौती दी, मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे वंश को नष्ट कर दूंगा। कुछ साल बाद चाणक्य एक युवा लड़के के लिए राज्य में घूमे, आखिरकार उन्हें चंद्रगुप्त एक सक्षम और आत्मविश्वासी लड़के के रूप में मिला। जो चाणक्य के लक्ष्य को पूरा कर सकता था। उन्होंने धनानंद वंश को नष्ट करने के लिए प्र...