बिहार की शिक्षा व्यवस्था।
बिहार देश की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला ओर सर्वाधिक नवयुवकों वाला राज्य है। बिहार के लोगों की प्रतिभा का कायल पूरा संसार है। यही वो धरती है , जहां से आजादी का बिगूल बजा था। यह कला एवं संस्कृति के मामले में विशेष रूप से समृद्ध है।
- यही राज्य ने समूचे विश्व को नालंदा विश्वविद्यालय जैसे
उत्कृष्ट जगह प्रदान किया। जहां पर लोग शिक्षा से अवगत हो सके।
लेकिन आज के समय में , यहां की शिक्षा व्यवस्था उच्च कोटि की नहीं रही। किसी भी समाज का उत्थान वहां की सरकार और नागरिक के सहयोग के बगैर नहीं हो सकती। आजादी के बाद भी इस राज्य की ऐसी दुर्दशा है। यहां के जनता व विद्यार्थियों के साथ अन्याय किया जा रहा है।वैसे यहां की जनसंख्या के आंकड़े कम नहीं।लेकिन सरकार का यह दायित्व बनता है।
शिक्षा ओर समाज के उत्थान में अपना शत प्रतिशत योगदान करे।लेकिन ऐसा कभी आजादी के बाद देखने को नहीं मिला। प्राथमिक विद्यालयों में उच्च कोटि की शिक्षा नहीं दी जाती।
शिक्षक आराम से तनख्वाह पाता है। शिक्षक व सरकार का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को आसानी से पास व उत्कृष्ट स्थान दिलाना, चाहे वो नकल के माध्यम से हो या आपसी सहमति से हो।।चाहे वह उसके लायक हो या नहीं ।
- यहां के विद्यार्थी ज्ञान अर्जन के वजाय डिग्री लेने में ही विश्वास करते है।
- यहां की सरकार को भी पूर्ण रूप से जागरूक होना पड़ेगा। भ्रष्टाचार को खत्म करना होगा। आरक्षण जाति के आधार पर नहीं बल्कि वित्तीय स्थिति के अनुसार तय होनी चाहिए। सरकार को उच्च कोटि की शिक्षा का स्तर तैयार करना चाहिए।
- फालतू विषयों को हटाना चाहिए ।
जिससे विद्यार्थी सही ज्ञान को प्राप्त कर सके। शिक्षा में वेद, उपनिषद्,आदि सामग्री को भी सम्मिलित करनी चाहिए। - जिससे वे मानसिक एवं शारीरिक रूप से सक्षम हो सके।
- शिक्षा ऐसी हो जो उन्हें जीना सिखाए। जीवन के सभी आयामों में लागू हो सके।उन्हें जीविका उपार्जन, युद्ध कौशल, उपचार संबंधित चीजे भी सिखाया जाए।जिससे वे जीवन के उतार चढ़ाव से चिंतित न हो।
- अपने जीवन का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सके।
- प्राचीन काल में ऐसी ही शिक्षा पर बल दिया जाता था,ऋषि मुनियों के द्वारा। यहीं कारण है,की हम श्रीराम जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम, कर्तव्यनिष्ठ , ओर आदर्श इंसान, योगेश्वर श्रीकृष्ण,ओर भक्त सुदामा, के रूप में देख पाए।
हम सब की सरकार से यही आग्रह रहेगी, सही शिक्षा पर बल दिया जाय।
जिससे विद्यार्थी सही ज्ञान को प्राप्त कर सके। शिक्षा में वेद, उपनिषद्,आदि सामग्री को भी सम्मिलित करनी चाहिए।



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