महादेव को बिल्वपत्र क्यों चढ़ाया जाता है? जानिए शिव पुराण का रहस्य

 🌿 महादेव को बिल्वपत्र क्यों चढ़ाया जाता है? — शिव भक्ति का गहरा रहस्य जब कोई भक्त श्रद्धा से शिवलिंग पर बिल्वपत्र अर्पित करता है, तो वह सिर्फ एक पत्ता नहीं चढ़ाता — वह अपनी आस्था, अपने कर्म और अपने जीवन की शुद्ध भावना भगवान शिव को समर्पित करता है। महादेव अत्यंत सरल हैं, और बिल्वपत्र उनकी प्रियतम भेंट मानी जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर बिल्वपत्र का इतना महत्व क्यों है? इस प्रश्न का उत्तर हमें शास्त्रों और विशेष रूप से शिव पुराण में मिलता है। • बिल्वपत्र का सरल अर्थ और महत्व बिल्वपत्र (बेल पत्र) एक पवित्र पत्ता है जिसकी तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी होती हैं। इसे भगवान शिव को अर्पित करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायक माना जाता है। सनातन परंपरा में कहा गया है कि —  बिल्वपत्र चढ़ाने से भगवान शिव तुरंत प्रसन्न होते हैं  यह सरल भक्ति का सबसे शक्तिशाली माध्यम है • शास्त्रीय संदर्भ (Shiv Puran Context) शिव पुराण के अनुसार, एक बिल्वपत्र अर्पित करने से भी अनेक यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है। शास्त्रों में वर्णन है कि — बिल्व वृक्ष स्वयं देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है...

क्या भगवान के बिना जीवन है?

     क्या भगवान के बिना जीवन है?


ईश्वर के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।
बिना भगवान का मतलब आत्मा के बिना'
भगवान, दूसरे शब्दों में देवता इस ब्रह्मांड में व्यापक और सर्वव्यापी रूप है।
मुख्य बात तो यह है ,की हमारा अस्तित्व ही नहीं रहेगा।
क्योंकि दिव्य ऊर्जा जो हमारे शरीर में निवास करता है ।
वह और कोई नहीं चेतना स्वरूप भगवान ही है।
अगर भगवान के लिए भक्ति  हमारे शरीर में नहीं है तो हम पशु बन जाएंगे, पशु जैसा व्यवहार करेंगे। हमारी नैतिकता पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगी, हम राक्षस की तरह व्यवहार करना शुरू कर देंगे।
प्यार, करुणा, चरित्र, गायब हो जाएगा।
हम अपने मन के, तथाकथित  इन्द्रियों के भी दास होंगे।
* हम क्रोध, काम, घृणा, हिंसा आदि से भरे रहेंगे। अगर ये चीजें हम में रहती हैं, तो विनाश की ओर एक कदम बढ़ जाएगा।
इसीलिए अध्यात्म और ईश्वर है ,हमारे जीवन में ,जो हमे , नैतिकता और चेतना को दृढ़ करने में सहायता करते है।
देवता परम रूप हैं, जो हममें निवास करते हैं। और हमारे तन को प्रकाशित करते हैं ,जिससे यह अंतिम क्षण तक अस्तित्व में रहता है।
सर्वोच्च देवता आशीर्वाद देते हैं, ताकि हम अच्छे कर्म करने के लिए कर्म का निर्णय कर सकें।
धन्यवाद।



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